कपूरथला में 99वां बसंत मेला, परंपरा को मिली नई पहचान

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कपूरथला में 99वां बसंत मेला, परंपरा को मिली नई पहचान

कपूरथला में बसंत मेले को मनाने की परंपरा आज़ादी से पहले से चली आ रही है। उस समय कपूरथला रियासत द्वारा इस ऐतिहासिक मेले का आयोजन किया जाता था। आज़ादी के बाद भी यह परंपरा जारी रही, हालांकि अलग-अलग सरकारों के दौरान कभी यह लगातार चलती रही और कभी बाधित भी हुई।

इसी ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कपूरथला में 99वें बसंत मेले का भव्य आयोजन किया गया। कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह की अगुवाई में हुए इस आयोजन ने शहर की सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर जीवंत कर दिया।

रंजीत बावा की मौजूदगी ने बढ़ाई रौनक

बसंत मेले के दौरान पंजाबी कलाकारों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। खास तौर पर प्रसिद्ध पंजाबी गायक रंजीत बावा की मौजूदगी ने मेले की रौनक को चार चांद लगा दिए। बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया।

पीली दस्तार बनी बसंत की पहचान

मेले में नगर निगम कपूरथला के काउंसलर, सामाजिक प्रतिनिधि और गणमान्य लोग पीली दस्तार पहने नजर आए। पीली दस्तार बसंत पर्व और बसंत मेले का प्रमुख प्रतीक मानी जाती है। आम लोगों ने भी भारी संख्या में शामिल होकर इस आयोजन को यादगार बना दिया।

मेलों की परंपरा आगे भी जारी रहेगी : राणा गुरजीत सिंह

इस मौके पर विधायक राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि ऐसे मेले समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक विरासत को संजोने का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ सरकारों की नाकामी के कारण यह परंपरा बीच-बीच में बाधित हुई, लेकिन अब इसे फिर से मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मियांवाला मेला सफलतापूर्वक आयोजित हो चुका है और यदि अगले वर्ष इन तारीखों में चुनाव नहीं हुए तो सुमवा मेला भी निश्चित रूप से आयोजित किया जाएगा।

विपक्ष की आलोचना पर साफ जवाब

विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि वे इस तरह की बातों की परवाह नहीं करते और एक सकारात्मक सोच के साथ विकास और सांस्कृतिक आयोजनों को आगे बढ़ाते रहेंगे।

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