अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव और मध्य पूर्व की स्थिति के कारण तेल बाजार अस्थिर बना हुआ है। जब भी युद्ध या तनाव की खबर आती है, तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं और जब स्थिति शांत दिखती है तो कीमतें गिर जाती हैं। तेल की कीमतों का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता बल्कि ट्रांसपोर्ट, खेती, उद्योग और रोजमर्रा की चीजों पर भी पड़ता है। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक बढ़ती हैं तो महंगाई बढ़ना तय माना जाता है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में तेल बाजार में और ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
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