जालंधर देहाती पुलिस की बड़ी कार्रवाई: नकोदर में फायरिंग साजिश नाकाम, जबरन वसूली केस में दो आरोपी मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार
फोकस कीवर्ड: जालंधर देहाती पुलिस, नकोदर फायरिंग मामला, जबरन वसूली केस, पुलिस मुठभेड़, गोल्डी बराड़ गैंग
जालंधर, 4 फरवरी 2026
पंजाब में संगठित अपराध के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई के तहत जालंधर देहाती पुलिस ने नकोदर क्षेत्र में एक बड़ी वारदात को समय रहते नाकाम कर दिया। पुलिस ने योजनाबद्ध फायरिंग और जबरन वसूली से जुड़े एक गंभीर मामले में मुठभेड़ के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो विदेश में बैठे गैंगस्टरों के इशारे पर काम कर रहे थे।
क्या है पूरा मामला?
नकोदर शहर निवासी व्यवसायी मनीष बख्शी उर्फ मन्नू, जो पिछले 16–17 वर्षों से बख्शी ट्रैवल कंपनी और बी.बी. स्कूल ऑफ आईलेट्स का संचालन कर रहे हैं, को नवंबर 2025 में विदेशी मोबाइल नंबरों से लगातार धमकी भरे कॉल आने लगे। कॉल करने वालों ने खुद को कुख्यात गोल्डी बराड़ और रोहित गोधरा गैंग से जुड़ा बताते हुए ₹5 करोड़ की फिरौती की मांग की।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना सिटी नकोदर में एफआईआर नंबर 137 (दिनांक 14.11.2025) दर्ज की गई, जिसमें बीएनएस की गंभीर धाराएं लगाई गईं। लेकिन इसके बावजूद आरोपियों की आपराधिक गतिविधियां नहीं रुकीं।
फायरिंग की झूठी सूचना और नई एफआईआर
जनवरी 2026 की मध्य रात्रि में शिकायतकर्ता को फिर से विदेशी नंबरों से संदेश मिले, जिनमें दावा किया गया कि फिरौती न देने के कारण उसके कार्यालय के बाहर फायरिंग कर दी गई है। इस घटना के बाद एफआईआर नंबर 13 (दिनांक 18.01.2026) दर्ज की गई, जिसमें बीएनएस की कई धाराओं के साथ आर्म्स एक्ट की धारा 25/27 भी जोड़ी गई।
यह साफ हो गया था कि आरोपी दोबारा किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं।
पुलिस की रणनीति और नाकाबंदी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह विर्क के निर्देशों पर विशेष पुलिस टीमें गठित की गईं। डीएसपी नकोदर ओंकार सिंह बराड़ और डीएसपी इंदरजीत सिंह सैनी की निगरानी में पुलिस ने तकनीकी और मानवीय इनपुट के आधार पर आरोपियों पर नजर रखनी शुरू की।
4 फरवरी 2026 को मिली पुख्ता गुप्त सूचना के आधार पर नकोदर पुलिस ने बीड़ पिंड फाटक से नूरमहल रोड की ओर जाने वाली लिंक रोड पर नाकाबंदी की।
मुठभेड़ में दो आरोपी काबू
नाकाबंदी के दौरान मोटरसाइकिल पर सवार दो संदिग्धों को रुकने का इशारा किया गया, लेकिन उन्होंने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। आत्मरक्षा में पुलिस ने नियंत्रित जवाबी कार्रवाई की।
इस मुठभेड़ में—
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अंकित कुमार उर्फ अंकित गोली लगने से घायल हुआ
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हरिंदर गुप्ता उर्फ हरिंदर को पैर में फ्रैक्चर की चोट आई
दोनों को मौके पर ही काबू कर लिया गया और पुलिस निगरानी में अस्पताल भेजा गया।
हथियार और बरामदगी
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से—
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एक .30 बोर पिस्टल
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तीन जिंदा कारतूस
बरामद किए हैं, जिससे यह साफ होता है कि आरोपी किसी नई फायरिंग की साजिश को अंजाम देने वाले थे।
आरोपियों की पहचान
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अंकित कुमार उर्फ अंकित – मूल निवासी सीतामढ़ी, बिहार; वर्तमान निवासी लुधियाना
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हरिंदर गुप्ता उर्फ हरिंदर – मूल निवासी गोरखपुर, उत्तर प्रदेश; वर्तमान निवासी लुधियाना
दोनों आरोपी पहले से ही जबरन वसूली और फायरिंग मामलों में नामजद थे।
आगे की जांच जारी
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के विदेशी संपर्कों, फंडिंग और गैंग नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है। इस केस में शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
नकोदर फायरिंग मामला एक बार फिर साबित करता है कि पंजाब पुलिस संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है। समय रहते की गई इस कार्रवाई से न केवल एक बड़ी वारदात टली, बल्कि आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा भी मजबूत हुआ है।


